लम्बे समय तक लिंग खड़ा रहना (प्रियपिज्म) के कारण, लक्षण और इलाज

प्रियपिज्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें लिंग अकारण काफी देर तक खड़ा रहता है और कभी-कभार इसमें दर्द भी होता है।

यह तब होता है जब लिंग बिना यौन उत्तेजना के चार घंटे या उससे अधिक समय तक खड़ा रहता है।

प्रियपिज्म एक कम आम समस्या है, लेकिन यह आमतौर पर 30 वर्ष की आयु के आसपास के पुरुषों को प्रभावित करती है।

प्रियपिज्म दो प्रकार के होते हैं, लो-फ्लो या इस्केमिक प्रियपिज्म और हाई-फ्लो या नॉनइस्केमिक प्रियपिज्म।

इस्केमिक प्रियपिज्म तब होता है जब रक्त लिंग के चैम्बर में फंस जाता है।

नॉनइस्केमिक प्रियपिज्म लिंग की किसी रक्त वाहिका के फटने के कारण होता है जिससे उसमें ठीक से रक्त प्रवाह नहीं हो पाता। आमतौर पर यह लिंग में चोट लगने के कारण होता है।

लिंग का चार घंटे से अधिक समय तक खड़ा रहना एक मेडिकल इमरजेंसी है। क्योंकि आपके लिंग में फंसे रक्त में ऑक्सीजन कम होने लगती है और यह ऊतकों को नुकसान पहुँचाने लगता है।

इसलिए प्रियपिज्म का उपचार न कराने पर लिंग के ऊतक मरने लगते हैं और व्यक्ति को स्थाई इरेक्टाइल डिसफंक्शन हो सकता है।

लक्षण

इस समस्या के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपको लो-फ्लो प्रियपिज्म है या हाई-फ्लो।

लो-फ्लो प्रियपिज्म में आपको निम्न लक्षण अनुभव हो सकते हैं:

  • चार घंटों से अधिक समय तक लिंग खड़ा रहता है
  • लिंग की शाफ्ट कठोर होना, लेकिन मुठ मुलायम
  • लिंग में दर्द होना

लौ-फ्लो या इस्केमिक प्रियपिज्म एक बार-बार होने वाली समस्या हो सकता है। शुरुआत में इसके लक्षण कुछ मिनटों या थोड़े समय तक ही रह सकते है। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, इसकी अवधि बढ़ती जाती है।

यदि आपको हाई-फ्लो प्रियपिज्म, तो आपके कुछ लक्षण लौ-फ्लो प्रियपिज्म के समान ही होंगे। इनमें मुख्य अंतर यह है कि हाई-फ्लो प्रियपिज्म में दर्द नहीं होता।

किसी भी स्थिति में, यदि किसी यौन उत्तेजना के बिना आपका लिंग चार घंटे से अधिक समय तक खड़ा रहता है, तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

कारण

सामान्य रूप से लिंग तब खड़ा होता है जब आपको कोई शारीरिक या मानसिक उत्तेजना हो। उत्तेजना के कारण लिंग में रक्त प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे वह खड़ा हो जाता है। उत्तेजना खत्म होने पर लिंग में रक्त का प्रवाह भी कम होने लगता है और वह बैठ जाता है।

प्रियपिज्म में आपके लिंग के रक्त संचार में समस्या होती है। लिंग के अंदर और बाहर के रक्त प्रवाह को कई स्थितियाँ प्रभावित कर सकती हैं।

इनमें से मुख्य परिस्थितियाँ या विकार निम्न हैं:

  • सिकल सेल एनीमिया होना, जिसमें ऑक्सीजन ले जाने वाले रेड ब्लड सेल्स की कमी हो जाती है
  • ल्यूकेमिया, जो ब्लड और बोन मेरो का कैंसर होता है
  • मल्टीपल मायलोमा, जो ब्लड के प्लाज्मा सेल्स का कैंसर होता है

सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित लगभग 42 प्रतिशत पुरुष अपने जीवन में कभी न कभी प्रियपिज्म का अनुभव करते हैं।

यदि आप कुछ मेडिकल दवायें लेते हैं या शराब, मारिजुआना और अन्य अवैध ड्रग्स का दुरुपयोग करते हैं, तब भी आपको प्रियपिज्म हो सकता है।

मेडिकल दवायें जो लिंग में रक्त के प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं, वह निम्न हैं:

  • इरेक्टाइल डिसफंक्शन की दवायें
  • एंटीडिप्रेसेंट या डिप्रेशन को कम करने वाली दवायें
  • अल्फा-ब्लॉकर्स दवायें, जो अक्सर हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को दी जाती हैं
  • चिंता विकारों को दूर करने वाली दवायें
  • रक्त को पतला करने वाली दवायें
  • हॉर्मोन थेरेपी
  • कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता
  • ब्लैक विडो मकड़ी का काटना
  • मेटाबोलिज्म विकार
  • न्यूरोजेनिक विकार
  • लिंग का कैंसर

पहचान

हालाँकि दोनों प्रकार के प्रियपिज्म के लक्षण एक जैसे होते हैं, इसलिए आपको लो-फ्लो प्रियपिज्म है या हाई फ्लो, इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर आपके कुछ टेस्ट करेगा।

दोनों प्रकारों में उपचार के विकल्प अलग-अलग होते हैं।

कभी-कभी, डॉक्टर लक्षणों और जननांग क्षेत्र की शारीरिक जांच के आधार पर प्रियपिज्म की पहचान कर सकते हैं।

प्रियपिज्म के प्रकार को निर्धारित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले परीक्षण निम्न हैं:

रक्त गैस माप

इस प्रक्रिया में आपके लिंग में सुई डालकर रक्त का नमूना एकत्र किया जाता है।

यदि नमूने से पता चलता है कि आपके लिंग के रक्त में ऑक्सीजन की कमी है, तो आपको लो-फ्लो प्रियपिज्म है। लेकिन अगर नमूने में रेड सेल्स अधिक पाए जाते है, तो आपको हाई-फ्लो प्रियपिज्म है।

ब्लड टेस्ट

चूंकि प्रियपिज्म अन्य बीमारियों और रक्त विकारों के कारण भी हो सकता है, इसलिए डॉक्टर आपके रेड ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स के स्तर की जांच के लिए रक्त का नमूना भी एकत्र कर सकता है।

इससे डॉक्टर को रक्त विकार, कैंसर और सिकल सेल एनीमिया की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

टॉक्सिकोलॉजी टेस्ट

इस टेस्ट के जरिये शरीर में विषाक्त पदार्थों की जाँच की जाती है।

प्रियपिज्म नशीली दवाओं के दुरुपयोग से भी होता है, इसलिए डॉक्टर आपके सिस्टम में नशीले पदार्थों की पहचान के लिए मूत्र का नमूना एकत्र कर सकता है।

अल्ट्रासाउंड

लिंग में रक्त प्रवाह को मापने के लिए डॉक्टर अल्ट्रासाउंड का उपयोग करते हैं।

यह परीक्षण डॉक्टर को यह निर्धारित करने में भी मदद करता है कि कहीं किसी आघात या चोट के कारण तो आपको प्रियपिज्म नहीं हुआ।

उपचार

उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि आपको लो-फ्लो प्रियपिज्म है या हाई-फ्लो।

यदि आपको लो-फ्लो प्रियपिज्म है, तो डॉक्टर सबसे पहले आपके लिंग में फंसे अतिरिक्त रक्त को निकालने के लिए सुई और सिरिंज का उपयोग करेगा। इससे दर्द को दूर करने और अनैच्छिक इरेक्शन को रोकने में कुछ हद तक मदद मिल सकती है।

एक अन्य उपचार पद्धति में आपके लिंग में दवा का इंजेक्शन लगाया जायेगा। दवा आपके लिंग के अंदर रक्त ले जाने वाली वाहिकाओं को सिकोड़ देगी, और बाहर ले जाने वाली वाहिकाओं को चौड़ा कर देगी। इससे खड़े लिंग को बैठाने में मदद मिलेगी।

यदि इनमें से कोई भी उपचार काम नहीं करता है, तो आपका डॉक्टर लिंग में रक्त प्रवाह को ठीक करने के लिए सर्जरी की सलाह दे सकता है।

यदि आपको हाई-फ्लो प्रियपिज्म है, तो तत्काल इसका उपचार कराना आवश्यक नहीं है। आमतौर पर इस प्रकार का प्रियपिज्म अपनेआप ठीक हो जाता है। लिंग पर आइस पैक की कोल्ड थेरेपी इसमें तुरंत राहत देने में मदद कर सकती है।

लिंग में चोट या आघात के कारण हुए प्रियपिज्म में डॉक्टर क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाओं की मरम्मत के लिए सर्जरी का सुझाव देते हैं।

यदि आपको प्रियपिज्म बार-बार होता है, तो आप डॉक्टर से सलाह लेकर फिनाइलफ्राइन (phenylephrine) दवा ले सकते हैं। यह दवा लिंग में रक्त संचार को कम कर देती है। लेकिन कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह के इस दवा का सेवन न करें, क्योंकि यह दवा ब्लड प्रेशर को बड़ा देती है जिससे आपको अन्य हृदय और रक्त संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

यदि किसी अन्य समस्या जैसे सिकल सेल एनीमिया, रक्त विकार आदि के कारण आपको प्रियपिज्म हुआ है, तो इन समस्याओं का उचित इलाज करवाएं।

निष्कर्ष

यदि आप शीघ्र उचित उपचार करवाते हैं तो प्रियपिज्म को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।

सर्वोत्तम संभव इलाज के लिए, यह महत्वपूर्ण है कि आप किसी अच्छे विशेषज्ञ से इलाज करवाएं। प्रियपिज्म होने के कई कारण हो सकते हैं, और सही कारण का पता लगाकर उसका उचित इलाज करवाना आवश्यक है।

खासकर अगर आपमें समस्या बार-बार होती है, आइस थेरेपी काम नहीं करती है और समस्या लिंग में चोट लगने के कारण नहीं हुई है।

प्रियपिज्म का समय पर उचित उपचार न करवाने पर इसके कारण स्थाई इरेक्टाइल डिसफंक्शन हो सकता है या आप हमेशा के लिए नामर्द बन सकते हैं।

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