लाइकेन स्क्लेरोसस के कारण, लक्षण और इलाज

लाइकेन स्क्लेरोसस एक स्किन का रोग है।

इसके कारण स्किन पर चमकदार गोरे धब्बे बनते हैं, जो सामान्य स्किन से पतले होते हैं।

यह समस्या आपके शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है, लेकिन आमतौर पर यह जननांग और गुदा क्षेत्र की स्किन को प्रभावित करती है।

ज्यादातर मामलों में लाइकेन स्क्लेरोसस महिलाओं की योनि पर होता है।

लक्षण

कभी-कभी लाइकेन स्क्लेरोसस के हल्के मामलों पर हमारा ध्यान नहीं जाता, क्योंकि इनमें सफेद, चमकदार स्किन के अलावा कोई अन्य शारीरिक लक्षण नहीं दिखते। प्रभावित स्किन थोड़ी उभरी भी हो सकती है।

चूँकि अक्सर प्रभावित क्षेत्र योनी और जननांग के आसपास होते हैं, इसलिए जब तक अन्य लक्षण न हों, उन पर ध्यान देना मुश्किल होता है।

यदि आपको लाइकेन स्क्लेरोसस के अन्य लक्षण होते हैं, तो वह निम्न हो सकते हैं:

  • खुजली, जो हल्की से लेकर गंभीर तक हो सकती है
  • असहजता
  • दर्द
  • मुलायम सफेद धब्बे
  • सेक्स में दर्द होना

चूंकि लाइकेन स्क्लेरोसस से प्रभावित स्किन सामान्य से पतली होती है, इसलिए इसमें आसानी से खरोंच आ सकती या फफोले हो सकते हैं। गंभीर मामलों में, इसमें आसानी से घाव लग सकता है।

कारण

वैज्ञानिकों को अभी तक पता नहीं चल पाया है कि लाइकेन स्क्लेरोसस होने का क्या कारण है। हालाँकि वह इस बात पर निश्चित हैं कि लाइकेन स्क्लेरोसस संक्रामक नहीं होता और छूने, सेक्स करने आदि से एक दूसरे में नहीं फैलता।

हालांकि, यह क्यों विकसित होता है, इसके बारे में कई थ्योरी मौजूद हैं। इनमें से कुछ निम्न हैं:

  • स्किन को पहले कभी क्षति पहुँचना
  • हॉर्मोन का बैलेंस गड़बड़ होना
  • कोई इम्यून सिस्टम का विकार होना

कुछ लोगों में लाइकेन स्क्लेरोसस विकसित होने का जोखिम अधिक होता है, जो निम्न हैं:

  • रजोनिवृत्ति महिलाएं
  • खतनारहित पुरुष, क्योंकि पुरुषों में यह समस्या अक्सर फोरस्किन को प्रभावित करती है
  • बच्चे जो अभी तक यौवनावस्था से नहीं गुजरे हैं

पहचान

यदि आपको संदेह है कि आपको लाइकेन स्क्लेरोसस हो सकता है, तो डॉक्टर इसकी पहचान करने में आपकी मदद कर सकता है। आप इसकी जाँच एक जनरल डॉक्टर से करा सकते हैं। हालाँकि पुरुषों को यूरोलोजिस्ट और महिलाओं को स्त्री रोग विशेषज्ञ को दिखाना बेहतर विकल्प होता है।

डॉक्टर सबसे पहले आपके शारीरिक इतिहास के बारे में पूछेगा। वह आपकी शारीरिक जाँच भी करेगा और प्रभावित क्षेत्र को देखेगा।

अधिकतर मामलों में, डॉक्टर सिर्फ शारीरिक जाँच करके ही लाइकेन स्क्लेरोसस की पहचान कर लेता है, हालांकि एक निश्चित पहचान के लिए वह स्किन की बायोप्सी कर सकता है।

बायोप्सी में डॉक्टर आपके प्रभावित क्षेत्र को एक लोकल एनेस्थीसिया देगा और फिर उसका एक नमूना लेगा। नमूने को लैब टेस्ट के लिए भेज दिया जायेगा।

क्या लाइकेन स्क्लेरोसस से अन्य जटिलताएं पैदा हो सकती हैं?

लाइकेन स्क्लेरोसस के कारण आपकी प्रभावित स्किन पर छाले, फफोले और यहाँ तक कि खुले घाव भी हो सकते हैं। अगर इन घावों को साफ नहीं रखा गया तो ये संक्रमित हो सकते हैं। चूंकि यह अक्सर जननांग और गुदा क्षेत्र में होते हैं, इसलिए संक्रमण को रोकना मुश्किल हो सकता है।

इसकी भी थोड़ी सम्भावना है कि लाइकेन स्क्लेरोसस एक प्रकार के स्किन कैंसर में विकसित हो जाए, जिसे स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा कहा जाता है। यदि आपका लाइकेन स्क्लेरोसस स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा में बदल जाता है, तो वह लाल गांठ, अल्सर या परत वाले क्षेत्रों के समान हो सकता है।

उपचार

बच्चों से जुड़े मामलों को छोड़कर, जो अक्सर अपने आप ठीक हो जाते हैं, लाइकेन स्क्लेरोसस को जड़ से ठीक नहीं किया जा सकता। हालांकि, इसके धब्बों का इलाज उपलब्ध है।

इसके मुख्य उपचार विकल्प निम्न हैं:

  • टोपिकल कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स (corticosteroids), जिन्हें अक्सर दैनिक रूप से लगाना होता है
  • पुरुषों से जुड़े गंभीर मामलों में फोरस्किन को हटाना
  • अगर यह धब्बे जननांगों पर नहीं हैं, तो अल्ट्रावायलेट लाइट से उपचार संभव है
  • इम्यून सिस्टम को व्यवस्थित करने वाली दवाएं जैसे पिमेक्रोलिमस (pimecrolimus)

यदि योनि के कसने के कारण महिलाओं को सम्भोग में दर्द होता है, तो डॉक्टर आपको योनि चौड़ा करने वाले डिवाइस, पानी आधारित लुब्रीकेंट या सुन्न करने वाली क्रीम लिख सकता है।

निष्कर्ष

बच्चों में लाइकेन स्क्लेरोसस होने पर, जब बच्चा यौवनावस्था से गुजरता है तो समस्या अपनेआप ठीक हो जाती है।

वयस्क व्यक्तियों में लाइकेन स्क्लेरोसस को ठीक करने का कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों को कम करने में मदद करने वाले उपचार विकल्प उपलब्ध हैं।

खुद की निम्न तरीकों से देखभाल करने से, लाइकेन स्क्लेरोसस से जुड़ी भविष्य की जटिलताओं को रोकने में मदद मिल सकती है:

  • पेशाब करने के बाद प्रभावित क्षेत्र को सावधानीपूर्वक साफ करना और सुखाना
  • प्रभावित क्षेत्र पर कठोर या रासायनिक साबुन लगाने से परहेज करना
  • कैंसर के लक्षणों के लिए प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी करना

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