ह्यूमन पैपिलोमावाइरस (एचपीवी) संक्रमण के कारण, लक्षण, इलाज, रोकथाम और जटिलताएं

ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) एक वायरल संक्रमण है, जो स्किन के संपर्क के माध्यम से लोगों के बीच फैलता है।

एचपीवी के 100 से अधिक प्रारूप हैं, जिनमें से 40 से अधिक प्रारूप यौन संपर्क के माध्यम से फैलते हैं और आपके जननांगों, मुंह या गले को प्रभावित कर सकते हैं।

अमेरिका के सीडीसी संस्थान के अनुसार, एचपीवी सबसे आम यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) है।

यह इतना सामान्य है कि अधिकांश यौन सक्रिय लोगों को अपने जीवन में कभी न कभी इस वायरस का कोई न कोई प्रारूप संचरित होता है, भले ही उनके कम सेक्सुअल पार्टनर हों।

जननांग एचपीवी संक्रमण के कुछ मामलों में कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं होती। हालांकि, कुछ प्रकार के एचपीवी जननांग मस्से और यहां तक ​​कि गर्भाशय ग्रीवा, गुदा और गले के कैंसर के विकास का कारण भी बन सकते हैं।

एचपीवी के कारण

एचपीवी संक्रमण का कारण बनने वाला वायरस स्किन संपर्क के माध्यम से फैलता है। अधिकांश लोगों को योनि, गुदा और मुख मैथुन जैसे सीधे यौन संपर्क के माध्यम से जननांग एचपीवी संक्रमण होता है।

चूंकि एचपीवी स्किन के संपर्क से फैलता है, इसलिए यह सिर्फ किसिंग फोरप्ले आदि से भी फ़ैल सकता है।

बहुत से लोगों को पता ही नहीं होता कि उनमें एचपीवी का संक्रमण है, जिसका अर्थ है भले ही आपके साथी में कोई लक्षण न हों तब भी आपमें यह फैल सकता है। कई प्रकार के एचपीवी का एक साथ होना भी संभव है।

कुछ दुर्लभ मामलों में एक संक्रमित महिला प्रसव के दौरान अपने बच्चे में एचपीवी फैला सकती है। जब ऐसा होता है, तो बच्चे में आवर्तक श्वसन पैपिलोमाटोसिस नामक एक स्थिति विकसित हो सकती है, जिसमें उसके गले या श्वसन तंत्र के अंदर एचपीवी के मस्से विकसित होते हैं।

एचपीवी के लक्षण

अक्सर, एचपीवी संक्रमण कोई भी ध्यान देने योग्य लक्षण या स्वास्थ्य समस्या विकसित नहीं करता है।

सीडीसी संस्थान के अनुसार, एचपीवी संक्रमण के 90 प्रतिशत (10 में से 9) मामले दो साल के भीतर अपने आप दूर हो जाते हैं। हालाँकि, इस समय के दौरान वायरस किसी और व्यक्ति में फैल सकता है।

जब वायरस अपने आप दूर नहीं होता, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। इनमें जननांग मस्से और गले में मस्से होना शामिल हैं (जिसे आवर्तक श्वसन पेपिलोमाटोसिस कहा जाता है)।

एचपीवी गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर और जननांगों, सिर, गर्दन और गले के अन्य कैंसर का कारण भी बन सकता है।

एचपीवी के प्रकार जो मस्से पैदा करते हैं, वे कैंसर पैदा करने वाले प्रकारों से भिन्न होते हैं। इसलिए एचपीवी के कारण होने वाले जननांग मस्से होने का मतलब यह नहीं है कि आपको कैंसर भी हो जाएगा।

एचपीवी के कारण होने वाले कैंसर अक्सर तब तक लक्षण नहीं दिखाते हैं जब तक कि कैंसर विकास के बाद के चरणों में न हो। नियमित जांच करवाते रहने से एचपीवी से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं की जल्दी पहचान करने में मदद मिल सकती है।

पुरुषों में एचपीवी

एचपीवी संक्रमण का अनुबंध करने वाले कई पुरुषों में कोई लक्षण नहीं होते हैं, हालांकि कुछ में जननांग मस्से विकसित हो सकते हैं। यदि आप अपने लिंग, अंडकोश, या गुदा पर कोई असामान्य चकत्ते या घावों को देखते हैं, तो अपने डॉक्टर से मिलें।

एचपीवी के कुछ प्रारूप पुरुषों में लिंग, गुदा और गले के कैंसर का कारण बन सकते हैं। कुछ पुरुषों को एचपीवी से संबंधित कैंसर विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है, जिनमें गुदा मैथुन करने वाले पुरुष और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले पुरुष शामिल हैं।

एचपीवी के उपभेद जो जननांग मस्सों का कारण बनते हैं, वे कैंसर का कारण नहीं होते हैं।

महिलाओं में एचपीवी

यह अनुमान लगाया गया है कि 80 प्रतिशत महिलाएं अपने जीवनकाल में कम से कम एक प्रकार के एचपीवी का अनुबंध करती हैं। पुरुषों की तरह ही, एचपीवी से ग्रसित कई महिलाओं में कोई लक्षण नहीं होते हैं और बिना किसी स्वास्थ्य समस्या के संक्रमण अपनेआप ठीक हो जाता है।

कुछ महिलाओं को दिखाई देने योग्य जननांग मस्से हो सकते हैं, जो योनि के अंदर, गुदा में या उसके आसपास और गर्भाशय ग्रीवा या योनी पर दिखाई दे सकते हैं।

यदि आप अपने जननांग क्षेत्र में या उसके आसपास कोई असामान्य घाव या चकत्ते देखती हैं, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

एचपीवी के कुछ प्रारूप गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर या योनि, गुदा या गले के कैंसर का कारण बन सकते हैं। नियमित जांच करवाने से महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से जुड़े बदलावों का पता लगाने में मदद मिल सकती है। इसके अतिरिक्त, गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं के डीएनए टेस्ट के माध्यम से एचपीवी के प्रारूप का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

एचपीवी की जाँच

पुरुषों और महिलाओं में एचपीवी की जांच अलग-अलग होती है।

महिला

डॉक्टरों के दिशा-निर्देशों के अनुसार हर महिला को 21 साल की उम्र में अपना पहला पैप टेस्ट करवा लेना चाहिए, भले ही फिर वो यौन रूप से सक्रिय हों या न हों।

नियमित पैप टेस्ट करवाने से महिलाओं में असामान्य कोशिकाओं की पहचान करने में मदद मिलती है। ये गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर या एचपीवी से संबंधित अन्य समस्याओं का संकेत दे सकते हैं।

21 से 29 साल की महिलाओं को हर तीन साल में एक पैप टेस्ट करवाना चाहिए। 30 से 65 वर्ष की आयु के बीच की महिलाओं को निम्न में से कोई एक कदम उठाना चाहिए:

  • हर तीन साल में एक पैप टेस्ट करवाना
  • हर पांच साल में एक एचपीवी टेस्ट करवाना चाहिए; यह उच्च जोखिम वाले एचपीवी के प्रकारों (hrHPV) को पहचानने में मदद करेगा
  • हर पांच साल में दोनों टेस्ट को एक साथ करवाना चाहिए; इसे को-टेस्टिंग के नाम से जाना जाता है

यदि आपकी उम्र 30 वर्ष से कम है और आपके पैप टेस्ट का परिणाम असामान्य आता है, तो डॉक्टर या स्त्री रोग विशेषज्ञ आपको एचपीवी टेस्ट करवाने की सलाह भी दे सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एचपीवी के कम से कम 14 प्रारूप हैं जो कैंसर का कारण बन सकते हैं। यदि आपमें इनमें से कोई एक प्रारूप मिलता है, तो डॉक्टर आपके गर्भाशय ग्रीवा के परिवर्तनों की जाँच करने के लिए नियमित टेस्ट करवाने की सलाह दे सकता है।

इस स्थिति में आपको बार-बार पैप टेस्ट करवाना पड़ सकता है। इसके अलावा, डॉक्टर आपको कुछ अन्य फॉलो-अप टेस्ट जैसे कोल्पोस्कोपी करवाने की भी सलाह दे सकता है।

गर्भाशय ग्रीवा में कैंसर को विकसित करने वाले परिवर्तन दिखाई देने में सालों लग सकते हैं, और एचपीवी संक्रमण अक्सर कैंसर पैदा किए बिना अपने आप दूर हो जाता है। इसलिए आपमें कोई असामान्य या पूर्व कैंसर कोशिकायें मिलने पर, इनका इलाज करवाने की जगह सालों तक नियमित टेस्ट करवाने की आवश्यकता हो सकती है।

पुरुष

आपको यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एचपीवी डीएनए टेस्ट केवल महिलाओं में एचपीवी की पहचान के लिए उपलब्ध है। पुरुषों में एचपीवी की पहचान के लिए वर्तमान में कोई कारगर टेस्ट उपलब्ध नहीं है।

कुछ डॉक्टर उन पुरुषों के गुदा का पैप टेस्ट कर सकते हैं, जिनमें गुदा कैंसर होने का खतरा ज्यादा दिखाई देता है। खासतौर से वह पुरुष जो गुदा सेक्स करते हैं या जो एचआईवी एड्स से संक्रमित हैं।

एचपीवी का उपचार

एचपीवी के अधिकांश मामले अपने आप दूर हो जाते हैं, इसलिए संक्रमण का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है।

इसके बजाय, आपका डॉक्टर नियमित जाँच करवाने की सलाह दे सकता है, ताकि यह पता चल सके कि क्या एचपीवी संक्रमण अभी भी बना हुआ है या नहीं। और यदि इसके कारण कोई कोशिका परिवर्तन तो विकसित नहीं हो रहा।

जननांग मस्सों का इलाज चिकित्सकीय दवाओं, बिजली से जलाने या तरल नाइट्रोजन से जमाने के जरिये संभव है। लेकिन, मस्सों से छुटकारा पाने से वायरस का इलाज नहीं होता है, और मस्से वापिस हो सकते हैं।

कैंसर की शुरुआती कोशिकाओं को निकालने के लिए डॉक्टर कीमोथेरपी, रेडिएशन थेरेपी या सर्जरी का सहारा ले सकता है। कुछ मामलों में इन विधियों को एक साथ करने की आवश्यकता हो सकती है।

एचपीवी संक्रमण को दूर करने के लिए वर्तमान में कोई प्राकृतिक उपचार भी उपलब्ध नहीं है।

इसलिए एचपीवी संक्रमण के परिणामस्वरूप होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं की जल्दी पहचान, निगरानी और उपचार के लिए नियमित जाँच करवाना महत्वपूर्ण है।

आपको एचपीवी कैसे हो सकता है?

जो व्यक्ति यौन रूप से किसी संक्रमित की स्किन के संपर्क में आता है, उसमें एचपीवी संक्रमण होने का खतरा होता है। अन्य कारक जो किसी को भी एचपीवी संक्रमण के जोखिम में डाल सकते हैं, वह निम्न हैं:

  • सेक्सुअल पार्टनरों की संख्या में वृद्धि
  • असुरक्षित योनि, मौखिक, या गुदा सेक्स
  • एक कमजोर इम्यून सिस्टम
  • एक ऐसा सेक्सुअल पार्टनर होना जिसमें एचपीवी संक्रमण है

यदि आपमें एक उच्च जोखिम वाले प्रकार का एचपीवी फैलता है, तो कुछ अन्य कारक संक्रमण के बने रहने और कैंसर में विकसित होने की सम्भावना को बड़ा सकते हैं। यह कारक निम्न हैं:

  • कमजोर इम्यून सिस्टम
  • अन्य एसटीडी, जैसे गोनोरिया, क्लैमाइडिया और हर्पीज सिम्प्लेक्स होना
  • दीर्घकालिक इन्फ्लेमेशन
  • कई बच्चे होना (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर)
  • लंबे समय तक मौखिक गर्भ निरोधक दवायें खाना (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर)
  • तंबाकू उत्पादों का उपयोग (मुंह या गले का कैंसर)
  • गुदा सेक्स करना (गुदा कैंसर)

एचपीवी की रोकथाम

एचपीवी से बचाव का सबसे आसान तरीका है, कंडोम का इस्तेमाल करना और सुरक्षित यौन संबंध बनाना।

इसके अलावा, गार्डासिल 9 टीका जननांग मस्से और एचपीवी के कारण होने वाले कैंसर की रोकथाम के लिए उपलब्ध है। यह टीका नौ प्रकार के एचपीवी से रक्षा कर सकता है, जो कैंसर या जननांग मस्सों का कारण बनते हैं।

डॉक्टर्स के अनुसार 11 या 12 साल की उम्र के लड़के और लड़कियों को इस टीके को लगवाना चाहिए। इस टीके को दो बार 6 महीने के अंतराल में लगाया जाता है। 15 से 26 वर्ष की आयु के महिलाएं और पुरुष भी इस टीके को तीन बार के डोज में लगवा सकते हैं।

इसके अलावा, 27 से 45 वर्ष के व्यक्ति भी डॉक्टर की सलाह से गार्डासिल 9 का टीका लगवा सकते हैं।

अंत में, एचपीवी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने के लिए, नियमित स्वास्थ्य जांच और पैप टेस्ट करवाते रहें।

एचपीवी और गर्भावस्था

एचपीवी अनुबंधित करने से आपके गर्भवती होने की संभावना कम नहीं होती है। यदि आप गर्भवती हैं और आपको एचपीवी है, तो शायद आप प्रसव के बाद इसका उपचार कराने के बारे में सोचें। हालांकि, कुछ मामलों में, एचपीवी संक्रमण गर्भावस्था में जटिलताओं का कारण बन सकता है।

गर्भावस्था के दौरान होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों के कारण जननांग मस्से बढ़ सकते हैं, और कुछ मामलों में इन मस्सों से खून भी आ सकता है। यदि जननांग मस्से व्यापक हैं, तो वह प्रसव को मुश्किल भी बना सकते हैं।

जब जननांग मस्से जन्म देने वाली नलिका को अवरुद्ध करने लगते हैं, तो आपको ऑपरेशन के जरिये प्रसव कराने की आवश्यकता होगी।

कुछ दुर्लभ मामलों में, एचपीवी वाली महिला इसे अपने बच्चे में भी फैला सकती है। जब ऐसा होता है, तो बच्चे को आवर्तक श्वसन पैपिलोमाटोसिस नामक एक दुर्लभ लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। इस समस्या में, बच्चे के स्वसन तंत्र में एचपीवी संक्रमण विकसित हो सकता है।

गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए आपको गर्भवती होने पर गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर और एचपीवी के लिए नियमित जांच जारी रखने की योजना बनानी चाहिए।

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