क्लैमाइडिया संक्रमण के कारण, लक्षण, जोखिम और इलाज

क्लैमाइडिया बैक्टीरिया के कारण होने वाला एक सामान्य यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) होता है। जिन लोगों को क्लैमाइडिया होता है, उनमें अक्सर प्रारंभिक अवस्था में बाहरी लक्षण दिखाई नहीं देते।

वास्तव में, अमेरिका के सेंटर फॉर यंग वुमेंस हेल्थ के अनुसार, किसी भी यौन संचारित संक्रमण से ग्रसित 90% महिलाओं और 70% पुरुषों में इसके कोई लक्षण नहीं होते। लेकिन क्लैमाइडिया बाद में कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

क्लैमाइडिया का उपचार न कराने से यह आपमें गंभीर जटिलताएँ पैदा कर सकता है, इसलिए अपनी नियमित जाँच करवाना महत्वपूर्ण है और यदि आपको कोई संदेह नजर आता है तो डॉक्टर से खुलकर बात करें।

क्लैमाइडिया के कारण

बिना कंडोम के सेक्स और असुरक्षित मुख मैथुन, क्लैमाइडिया संक्रमण फैलने के मुख्य कारण होते हैं।

लेकिन यह जरूरी नहीं कि यह सिर्फ सेक्स से ही फैलता हो। एक दूसरे के जननांगों को सिर्फ छूने से भी बैक्टीरिया संचारित हो सकता है। यह गुदा सेक्स के दौरान भी फैल सकता है।

नवजात शिशु जन्म के दौरान अपनी मां से क्लैमाइडिया प्राप्त कर सकते हैं। हालाँकि अधिकांश प्रसवपूर्व परीक्षणों में क्लैमाइडिया परीक्षण शामिल होता है, लेकिन प्रसवपूर्व जांच के दौरान OB-GYN टेस्ट के जरिये पुष्टि करने में कोई हर्ज नहीं है।

आंखों के साथ मौखिक या जननांग संपर्क के माध्यम से आँखों में क्लैमाइडिया हो सकता है, लेकिन इसकी सम्भावना काफी कम होती है।

क्लैमाइडिया किसी ऐसे व्यक्ति से भी फैल सकता है, जिसे एक बार पहले यह संक्रमण हो चुका हो और उसने इसका सफलतापूर्वक इलाज करा लिया हो।

क्लैमाइडिया होना कितना आम है?

यह संक्रमण पुरुष और महिला दोनों को हो सकता है, लेकिन महिलाओं में इसके अधिक मामले सामने आते हैं। संक्रमण की दर 15 से 24 वर्ष के बीच की महिलाओं में सबसे अधिक होती है।

इसलिए डॉक्टर्स के अनुसार 25 वर्ष से कम उम्र की सभी यौन रूप से सक्रिय महिलाओं को हर साल क्लैमाइडिया की जाँच करवानी चाहिए। साथ ही, अन्य महिलाएं जो नए या कई पार्टनर्स के साथ सेक्स करती हैं, उन्हें भी नियमित रूप से क्लैमाइडिया की जाँच करवाते रहना चाहिए।

आंकड़ों की बात करें तो जिस व्यक्ति ने एक से अधिक पार्टनर्स के साथ सेक्स किया है, उसमें यौन संचारित संक्रमण होने की सम्भावना ज्यादा होती है।

क्लैमाइडिया होने के अन्य जोखिम कारकों में अतीत में यौन संचारित संक्रमण होना, या वर्तमान में शरीर में कोई अन्य संक्रमण होना शामिल है, क्योंकि इससे शरीर की संक्रमण प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ जाती है।

पुरुषों में क्लैमाइडिया के लक्षण

अधिकांश पुरुषों में क्लैमाइडिया के कोई लक्षण नहीं होते हैं। और जिन्हें होते हैं वह इन्हें नोटिस नहीं कर पाते।

आमतौर पर इसके लक्षण संक्रमण के 1 से 3 हफ्ते बाद दिखाई देते हैं।

पुरुषों में क्लैमाइडिया के कुछ सबसे आम लक्षण निम्न हैं:

  • पेशाब के दौरान जलन होना
  • लिंग से पीला या हरा पदार्थ निकलना
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द होना
  • अंडकोषों में दर्द होना

गुदा में भी क्लैमाइडिया संक्रमण होना संभव है। इस मामले में, मुख्य लक्षण इस क्षेत्र से रिसाव, दर्द और रक्तस्राव होना होते हैं।

संक्रमण वाली किसी महिला के जननांगों पर मुख मैथुन करने से, आपके गले में क्लैमाइडिया होने का खतरा भी होता है। इसके लक्षणों में गले में खराश, खांसी या बुखार होना शामिल हैं। ऐसा भी संभव है कि आपके गले में बैक्टीरिया बिना कोई संक्रमण फैलाये लम्बे समय तक बना रहे, और मौका मिलने पर अन्य व्यक्ति के जननांगों में फैल जाए।

महिलाओं में क्लैमाइडिया के लक्षण

क्लैमाइडिया को अक्सर “मूक संक्रमण” के रूप में भी जाना जाता है। क्योंकि क्लैमाइडिया वाले अधिकतर लोगों को लक्षणों का बिल्कुल भी अनुभव नहीं होता है।

यदि कोई महिला संक्रमित होती है, तो कोई भी लक्षण प्रकट होने में कई सप्ताह लग सकते हैं।

महिलाओं में क्लैमाइडिया के कुछ सबसे आम लक्षण निम्न हैं:

  • संभोग के दौरान दर्द होना
  • योनि से रिसाव होना
  • पेशाब करते समय जलन होना
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द होना
  • गर्भाशय ग्रीवा में इन्फ्लेमेशन और सूजन होना
  • पीरियड्स के बीच में रक्तस्त्राव होना

कुछ महिलाओं में, संक्रमण फैलोपियन ट्यूब में फैल सकता है, जिससे पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी) नामक समस्या पैदा हो सकती है। पीआईडी एक मेडिकल इमरजेंसी होती है, जिसका तुरंत उपचार आवश्यक है।

पीआईडी के लक्षण निम्न हैं:

  • बुखार
  • पेल्विक में गंभीर दर्द होना
  • जी मचलना
  • मासिक धर्म के बीच में योनि से असामान्य रूप से खून बहना

क्लैमाइडिया मलाशय (गुदा के आंतरिक भाग) को भी संक्रमित कर सकता है। मलाशय में क्लैमाइडिया संक्रमण होने पर महिला को शायद लक्षणों का अनुभव न हो। हालांकि, यदि मलाशय में संक्रमण के लक्षण होते हैं, तो यह मलाशय में दर्द, रिसाव या रक्तस्राव हो सकते हैं।

इसके अलावा, यदि महिला किसी संक्रमित व्यक्ति के जननांगों को मुख से मैथुन करती है, तो उसे गले में संक्रमण हो सकता है। गले में क्लैमाइडिया के लक्षणों में खांसी, बुखार और गले में खराश शामिल हैं।

पुरुषों और महिलाओं में यौन संक्रमण के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए यदि आप उपरोक्त में से किसी भी लक्षण का अनुभव करते हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें।

क्लैमाइडिया का उपचार

अच्छी खबर यह है कि क्लैमाइडिया का इलाज आसान है। चूंकि यह एक बैक्टीरियल संक्रमण होता है, इसलिए इसका एंटीबायोटिक दवाओं के जरिये इलाज किया जाता है।

एज़िथ्रोमाइसिन (Azithromycin) एक एंटीबायोटिक है, जिसे आमतौर पर सिर्फ एक बड़ी खुराक में दिया जाता है। डॉक्सीसाइक्लिन (Doxycycline) एंटीबायोटिक को एक हफ्ते के लिए रोज दिन में दो बार लेना होता है।

ऐसी ही कई अन्य एंटीबायोटिक दवाएं क्लैमाइडिया के उपचार में कारगर होती हैं। डॉक्टर आपको जो भी एंटीबायोटिक देता है, उसका बताये गए अनुसार नियम से सेवन करें, ताकि संक्रमण जड़ से खत्म हो सके। दवा चाहे जो भी हो, क्लैमाइडिया के संक्रमण को पूरी तरह से खत्म होने में लगभग 2 हफ्तों का समय लगता है।

उपचार के दौरान, आपको सेक्स से पूरी तरह से परहेज करना है।

संक्रमण का पूरा इलाज हो जाने के बाद भी, बैक्टीरिया के संपर्क में आने पर आपको दोबारा क्लैमाइडिया संक्रमण होना संभव है।

हालाँकि क्लैमाइडिया का इलाज संभव है, लेकिन फिर भी इससे बचे रहने के उपाय करना आवश्यक होता है।

क्लैमाइडिया के घरेलू इलाज

क्लैमाइडिया एक बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होने वाली समस्या है। इस प्रकार के संक्रमण का एकमात्र सही इलाज एंटीबायोटिक दवाएं हैं।

कुछ घरेलू उपचार इसके लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन एक बात याद रखें कि क्लैमाइडिया का सही उपचार न कराने से आपमें प्रजनन क्षमता में कमी और जननांगों में इन्फ्लेमेशन जैसी दीर्घकालिक जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

क्लैमाइडिया के लिए घरेलू उपचार जो प्रभावी हो सकते हैं (लक्षणों के लिए, न कि संक्रमण के लिए), वह निम्न हैं:

  • गोल्डनसील: यह औषधीय पौधा संक्रमण के दौरान इन्फ्लेमेशन को कम करके, लक्षणों को सीमित करने में मदद कर सकता है।
  • एकिनेसिया (Echinacea): इस पौधे को व्यापक रूप से शरीर का इम्यून सिस्टम बढ़ाने में इस्तेमाल किया जाता है, ताकि आपको सामान्य सर्दी से लेकर स्किन के घावों तक कई प्रकार के संक्रमणों को दूर करने में मदद मिल सके। यह क्लैमाइडिया के लक्षणों को कम करने में भी मदद कर सकता है।

हालांकि इन पौधों में मौजूद यौगिकों को सामान्य इन्फ्लेमेशन और संक्रमण को कम करने में फायदेमंद माना जाता है, लेकिन अभी तक ऐसे कोई विशिष्ट शोध नहीं हुए हैं जो यह दर्शाते हों कि यह क्लैमाइडिया के लक्षणों के लिए प्रभावी होते हैं।

क्लैमाइडिया की जाँच

क्लैमाइडिया की जाँच में डॉक्टर सबसे पहले आपके लक्षणों के बारे में पूछेगा।

यदि लक्षण मौजूद हैं, तो डॉक्टर एक शारीरिक परिक्षण कर सकता है। इसमें वह किसी भी रिसाव, घाव या असामान्य धब्बों की जाँच करेगा, जो संभावित संक्रमण से संबंधित हो सकते हैं।

क्लैमाइडिया की पहचान करने के लिए सबसे प्रभावी टेस्ट होता है, महिलाओं में योनि के पानी और पुरुषों में मूत्र का परीक्षण करना। यदि गुदा या गले में संक्रमण होने की संभावना है, तो इन क्षेत्रों का नमूना भी लिया जा सकता है।

नमूनों के परिक्षण परिणाम आने में कुछ दिन लग सकते हैं। यदि परीक्षण में क्लैमाइडिया निकलता है, तो डॉक्टर आपको विभिन्न उपचार विकल्प बताएगा, जिनमें एंटीबायोटिक दवाएं मुख्य होंगी।

क्लैमाइडिया का उपचार न कराने पर क्या होता है?

क्लैमाइडिया का संदेह होते ही डॉक्टर के पास जाने से, संक्रमण संभवतः बिना किसी स्थायी समस्या के दूर हो जाता है।

हालांकि, यदि व्यक्ति इसके इलाज के लिए बहुत लेट हो जाता है, तो उसे कई गंभीर चिकित्सा समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

महिलाओं में अनुपचारित क्लैमाइडिया के परिणाम

क्लैमाइडिया का उपचार न कराने पर कुछ महिलाओं को पीआईडी विकसित हो सकता है, जो गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा और अंडाशय को नुकसान पहुंचा सकता है। पीआईडी ​​एक दर्दनाक बीमारी है, जिसे अक्सर अस्पताल में इलाज की आवश्यकता होती है।

क्लैमाइडिया को अनुपचारित छोड़ देने पर कुछ महिलाएं बांझ भी हो सकती हैं, क्योंकि उनकी फैलोपियन ट्यूब खराब हो सकती हैं।

संक्रमित गर्भवती महिलाएं जन्म के दौरान बैक्टीरिया को अपने बच्चों में फैला सकती हैं, जिससे नवजात शिशुओं की आंखों में संक्रमण और निमोनिया हो सकता है।

पुरुषों में अनुपचारित क्लैमाइडिया के परिणाम

क्लैमाइडिया का इलाज न कराने पर पुरुषों को भी कई समस्याओं का अनुभव हो सकता है।

एपिडीडिमिस, जो अंडकोषों को रखने वाली ट्यूब होती है, उसमें दर्द और सूजन हो सकती है। इसे एपिडीडिमाइटिस के नाम से जाना जाता है।

संक्रमण प्रोस्टेट ग्रंथि में भी फैल सकता है, जिससे आपको बुखार, संभोग के दौरान दर्द और पीठ के निचले हिस्से में परेशानी हो सकती है।

एक अन्य संभावित समस्या है क्लैमाइडियल यूरेथ्राइटिस (chlamydial urethritis), जो मूत्रमार्ग में होने वाला इन्फ्लेमेशन होता है और जिसके कारण व्यक्ति को पेशाब में जलन, दर्द, रिसाव आदि की समस्या हो सकती है।

यह क्लैमाइडिया का उपचार न कराने पर होने वाली सिर्फ कुछ सबसे आम समस्याएँ हैं, यही कारण है कि क्लैमाइडिया का तुरंत डॉक्टर से इलाज करवाना आवश्यक होता है। ज्यादातर लोग जो जल्दी इलाज करवा लेते हैं, उन्हें कोई दीर्घकालिक समस्या नहीं होती।

गले में क्लैमाइडिया

मुख मैथुन के दौरान भी यौन संचारित संक्रमण फैल सकता है। क्लैमाइडिया फैलने के लिए मुंह, होंठ या जीभ का संपर्क पर्याप्त हो सकता है।

यदि आपमें मुख मैथुन से क्लैमाइडिया फैल गया है, तो शायद आपको इसके कोई लक्षण दिखाई न दें। जननांगों की तरह गले के क्लैमाइडिया में भी हमेशा लक्षण दिखाई नहीं देते।

यदि गले में क्लैमाइडिया के लक्षण दिखते हैं, तो वह निम्न हो सकते हैं:

  • गले में खराश
  • गले में सूखापन
  • बुखार
  • खांसी

आँखों में क्लैमाइडिया

आमतौर पर क्लैमाइडिया संक्रमण जननांग क्षेत्र में होता है, लेकिन यह गुदा, गले और यहां तक कि आँखों जैसी कम आम जगहों पर भी हो सकता है।

यह बैक्टीरिया के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क के माध्यम से आँखों में हो सकता है।

उदाहरण के लिए, यदि आप बिना हाथ धोए अपनी आँखों को छूते हैं, तो संक्रमण जननांगों से आँख में जा सकता है।

यदि आपकी आँखों में क्लैमाइडिया संक्रमण है, तो इनमें निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

  • लालिमा
  • सूजन
  • खुजली
  • जलन
  • रिसाव या कीचड़ निकलना
  • प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता बढ़ना

उपचार न कराने पर आँख का क्लैमाइडिया अंधेपन का कारण बन सकता है। इसका इलाज काफी आसान होता है, और समय पर उपचार कराने पर आँखों को अन्य समस्याओं से बचाया जा सकता है।

आमतौर पर अधिकतर लोग आँखों के क्लैमाइडिया को कोई अन्य साधारण संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति काफी गंभीर हो सकती है। इसलिए यदि आपको अपनी आँखों में कोई भी संक्रमण का अनुभव हो जो 2-3 दिन में ठीक नहीं होता, तो तुरंत डॉक्टर से जाँच करवाएं।

क्लैमाइडिया और गोनोरिया

क्लैमाइडिया और गोनोरिया दो आम होने वाले यौन संचारित संक्रमण हैं। दोनों ही बैक्टीरिया के कारण होते हैं, जो योनि, मौखिक या गुदा मैथुन के दौरान फैल सकते हैं।

दोनों ही संक्रमणों में लक्षण दिखने की सम्भावना काफी कम होती है। यदि लक्षण होते हैं, तो क्लैमाइडिया वाले लोग संक्रमण प्राप्त करने के कुछ हफ्तों के भीतर लक्षणों का अनुभव करते हैं। जबकि गोनोरिया में संक्रमण प्राप्त करने के काफी लम्बे समय बाद लक्षण दिखाई देते हैं।

दोनों संक्रमणों में कुछ समान लक्षण होते हैं, जो निम्न हैं:

  • पेशाब के दौरान जलन या दर्द होना
  • योनि, लिंग या गुदा से असामान्य रिसाव निकलना
  • अंडकोषों में सूजन होना
  • मलाशय में दर्द
  • मलाशय से रक्तस्त्राव होना

इन दोनों ही संक्रमणों को यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो व्यक्ति को पीआईडी (पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज) और प्रजनन समस्याएं होने की सम्भावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है।

अनुपचारित गोनोरिया मलाशय में खुजली, खराश और दर्द पैदा कर सकता है, खासतौर से मल त्याग के दौरान। महिलाओं में अनुपचारित गोनोरिया के कारण लम्बे व भारी पीरियड्स हो सकते हैं और सेक्स में दर्द हो सकता है।

क्लैमाइडिया और गोनोरिया दोनों का एंटीबायोटिक दवाओं के जरिये प्रभावी ढंग से इलाज किया जा सकता है। जल्दी इलाज करवाने पर दोनों में ही कोई दीर्घकालिक समस्याएं होने की सम्भावना नहीं होती।

क्लैमाइडिया की रोकथाम

किसी भी यौन रूप से सक्रिय व्यक्ति के लिए क्लैमाइडिया से बचने का सबसे सुरक्षित तरीका होता है, संभोग के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करना।

सुरक्षित सेक्स के लिए, डॉक्टर निम्न सलाह देते हैं:

  • प्रत्येक नए साथी के साथ सेक्स करने पर कंडोम पहनें
  • नियमित रूप से अपनी और अपनी सेक्स पार्टनर की यौन संचारित संक्रमण (इसटीआई) की जाँच करवाएं
  • जब तक आपकी सेक्स पार्टनर की एसटीआई जाँच नहीं हो जाती, तब तक मुख मैथुन करने से बचें या इसके दौरान सुरक्षा का उपयोग करें।

सुरक्षित सेक्स का अभ्यास करने से आपको संक्रमण, अनचाही गर्भावस्था और अन्य जटिलताओं से बचने में काफी मदद मिल सकती है।

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